क्या आपको पता है, पर्सनल लोन न चुकाने पर बैंक आपके साथ क्या करेगा?

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जब कोई व्यक्ति लोन चुकाने में सक्षम नहीं होता है या जान बूझकर नहीं देता तो बैंक या लोनदाता क्या कर सकते हैं?

व्यक्तिगत लोन के मामले में, बैंक के पास कोई संपार्श्विक सम्पति नहीं रहती है। इसलिए व्यक्तिगत लोन को गैर-जमानती लोन कहा जाता है।

पर्सनल लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में, बैंकों के पास कुछगिने चुने ही विकल्प ही बचते हैं  होते हैं:

बैंकों के लिए सबसे अच्छा दांव डिफॉल्टर के साथ बातचीत की मेज पर बैठना और मुकदमेबाजी को सुलझाना है।

बातचीत

यह बैंकों के लिए भी सबसे पसंदीदा विकल्प है। क्यों? क्योंकि मुकदमों में बैंकों को एनपीए पर और भी पैसा खर्च करना होता है।

लेकिन अगर आपसी बातचीत विफल हो जाती है, तो बैंक अदालत जाने का फैसला कर सकता है।

पोस्ट डेटेड चेक का उपयोग

भले ही बैंक अदालत जाए लेकिन, चूंकि लोन चुकाना एक दीवानी विवाद है, इसलिए गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।

अत: समाशोधन के लिए पोस्ट डेटेड चेक चेक प्रस्तुत करने के लिए बैंक आपको बोल सकता है। चेक बाउंस होने पर नियमानुसार गिरफ्तारी हो सकती है।

अब हम जानते हैं कि अगर हम असुरक्षित लोन नहीं चुकाते हैं तो क्या होगा, लेकिन अगर हम सुरक्षित लोन जैसे कार या गृह लो आदि का भुगतान नहीं करते हैं तो क्या होगा?